आवारा दिल

 

ढलते थे आफताब के सायें जहाँ तेरी कुर्बत में
उन शामो के इंतज़ार में मेरी शामें अब आवारा है |

वो राते जिनमे मेरी घिसी हुई हथेलिया तेरे सर्द गालो को सेकती थी
उन रातो के इंतज़ार में मेरी राते अब आवारा है |

किस्सों से अपने जो रोशन कर देते थे मेरा जहाँ
उन बातो के इंतज़ार में मेरी बातें अब आवारा है |

सिमट जाते थे जिसमे इस दुनिया से पर्दा कर के
उन बाहों के इंतज़ार में ये मेरी बाहें अब आवारा है |

उंगलियों में तेरा साथ पिरो के तय किये थे जो रास्ते
उन राहो के इंतज़ार में मेरी राहें अब आवारा है |

पि जाते थे जो हर दर्द मेरा इक घुट में
उन आहों के इंतज़ार में मेरी आहें अब आवारा है |

हर साँस में जीते थे तेरी रूह की खुशबू
उन साँसों के इंतज़ार में मेरी सांसें अब आवारा है |

आँखो की नमी को जो इक झलक में पहचान लेती थी
उन निगाहों के इंतज़ार में मेरी निगाहें अब आवारा है |

वस्ल की उस सुहानी शब को अंजाम दे गए इस रिश्ते को
उस नाते के इंतज़ार में मेरे सारे नाते अब आवारा है |

तेरे बेशुमार प्यार और बेहरेहेम रुख की कश्मकश में सुलग के
तेरे इंतज़ार में तड़पता मेरा ये दिल ही अब आवारा है |

 

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1 Comment

  • Wow . Amazing .
    Pii jaate thy Jo Mera har Dard ik ghoont me can relate to this ghazal . Very nicely woven thread of words . Keep the ink flowing .
    Would love to read more .

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