कुछ अनकही बातें

बहुत दुःख है इस बात का कि जिस तरह,
मैंने तुम्हें अपनी सारी खुशियां, अपना सारा प्यार, और अपनी सारी जिंदगी देने की गलती की।
क्योंकि अब जब तुमने मुझे यू छोड़ दिया है तो,
आज ना मेरी खुशियां मेरे पास है, ना प्यार,
और ना ही मेरी जिंदगी।
हैं तो बस एक बेबस और बेघर साया जो
गुमनाम हैं कहीं…
मैं मानती हूं कि गलती ना तुम्हारी है ना मेरी है,
खुदा के फैसले के आगे किसी की नहीं चली है।
पर तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए,
उसकी दरगाह में कितनी चादरें​ बिछाई है।
कहते हैं किसी का बुरा ना सोचो ना तुम बुरा करो,
खुदा खुश रहेगा, तुम्हारे साथ सब अच्छा करेगा।
न जाने क्या गलती करी, क्या अनजाने में एसा करा,
कि खुदा ने मुझसे खफा हो कर मुझ​से तुम्हें ही छीन लिया…..
पर गम इस बात का नहीं कि तुम चले गए,
ना इस बात का गम कि तुम साथ छोड़ गए।
दर्द इस बात का है कि जिस तरह मैंने तुम्हें टूट
के चाहा,
तुम यह जानते हुए मुझे तोड़ गए।
अब बस जीती हूं अपनी बेरंग जिंदगी,
रंगीन स्याही के सहारे।

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1 Comment

  • Ae ishq tujhe bhi kabhi Ishq ho jaaye
    Tujhe pata toh chale tadapna kisko kehte Hain
    . I can relate to this one as well. Are all poets heart broken . I can feel the pain . So well expressed . Keep the Ink flowing 🙂

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